Shri Khatu Shyam

श्री खाटू श्याम चालीसा

॥ हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा ॥

॥ अथ श्री खाटू श्याम चालीसा ॥

॥ दोहा ॥

श्री गुरु चरण ध्यान धर,
सुमिर सचिदानन्द।

श्याम चालीसा भजत हूँ,
रच चौपाई छन्द॥

॥ चौपाई ॥

श्याम-श्याम भजि बारम्बार।
सहज ही हो भवसागर पार॥
घंट घडियाल बीच मृदंग।
माधुर धुनि सुर बाजत अंग॥
श्री प्रभु गोप वेश पलकारे।
अविरत छवि निर्माण विचारे॥
खाटू नगर में लियो अवतारा।
कलयुग में बाबा श्याम हमारा॥
फाल्गुन शुक्ल द्वादशी आई।
उत्सव भारी होय बधाई॥
निशदिन प्रभु मन्दिर में विराजे।
दर्शन करत सकल दुख भागे॥
मात-पिता की सेवा कीजै।
दुख दरिद्र सब दूर करीजै॥
तुम हो दीन-बन्धु हितकारी।
शरणागत की लाज तुम्हारी॥
बर्बरीक अति बली प्रचण्ड।
चण्ड-मुण्ड संहारे खण्ड-खण्ड॥
कृष्ण वचन सुन हर्षित भारी।
शिश दान दीन्हो हितकारी॥
महादानी प्रभु तुम कहलाए।
सुर-नर-मुनि सब शीश नवाए॥
जब-जब भीड़ पड़ी भक्तों पर।
दौड़े चले आए प्रभु तुम घर॥
पांच पाण्डव वन-वन भटके।
राख्यो लाज द्रौपदी की पटके॥
भीमसेन की विपदा टारी।
राक्षस मारि असुर संहारी॥
दुर्योधन का मान घटाया।
पार्थ की रक्षा करि मन भाया॥
महाभारत का युद्ध रचाया।
तीन बाण से सकल हिलाया॥
कृष्ण कृपा से नाम बढ़ाया।
श्याम कुण्ड में स्नान कराया॥
मोर छड़ी कर में अति सोहे।
कानन कुण्डल मन को मोहे॥
नील अश्व की सुन्दर सवारी।
भक्तन के तुम हो हितकारी॥
खाटू धाम तुम्हारो प्यारो।
निशदिन होत वहाँ उजियारो॥
श्याम कुण्ड सोहे अति सुन्दर।
पावन नीर बहे छल-छल कर॥
कोढ़ी अति दुख पावत भारी।
कुण्ड स्नान करे दुख टारी॥
रोग-दोष सब दूर हो जावे।
जो जन श्रद्धा से वहाँ आवे॥
झाड़ू लगावत जो कोई।
ताके कष्ट दूर सब होई॥
एकादशी को जागरण कीजे।
श्याम नाम का रस पी लीजे॥
कीर्तन भजन होय जहँ भारी।
तहाँ विराजत कृष्ण मुरारी॥
जो जन श्याम नाम गुण गावे।
जन्म-मरण संकट मिट जावे॥
साँचो प्रेम भाव जो लावे।
मनवांछित फल सो जन पावे॥
श्याम प्रभु की महिमा भारी।
सब मिल बोलो श्याम मुरारी॥
हारे का सहारा बाबा श्याम।
लखदातार है पूरण काम॥
निशदिन ध्यान धरे जो कोई।
ताके घर में आनन्द होई॥
श्याम भक्त जो शरण में आवे।
सब सुख भोग परम पद पावे॥
निशदिन रटे श्याम को नाम।
पूरण होय सब मन के काम॥
कलियुग देव श्याम भगवान।
भक्तन की राखो तुम आन॥
शरणागत की रक्षा कीजे।
भक्ति-दान प्रभु हमको दीजे॥
जो यह पाठ करे चालीसा।
तापर कृपा करें जगदीशा॥
श्याम नाम की जय-जयकार।
होवे सकल जगत उद्धार॥
कहत 'भक्त' कर जोड़ि पुकारी।
शरण पड़े की लाज तुम्हारी॥

॥ दोहा ॥

श्याम सलोने साँवरे,
करो भक्त का ध्यान।

रहूँ चरण के दास मैं,
दीजै ज्ञान विमल॥

॥ जय श्री श्याम ॥
Khatu Shyam

खाटू श्याम चालीसा

संपूर्ण पाठ

अन्य चालीसा पढ़ें