हे समरथ! परमात्मा, तू सबका आधार,
कण-कण में तू बस रहा, तू शक्ति अपार।
तेरा सकल पसारा है, सृष्टि से भी पार,
तेरी शान निराली है, महिमा अपरंपार।
तू राजा अधिराज है, सबका पालनहार,
आदि तू ही है अंत तू, दीन-दुखी का तार।
हर पल तेरा आसरा, सतगुरु तेरी कृपा अपार,
चरणों में क्षमा याचना, आया तेरे द्वार।
भला करो संसार का, दुखभंजन निराकार,
श्वास-श्वास सिमरन करूं, मेरे प्रभु सुख सार।
॥ सबका भला करो भगवान ॥