सनातन धर्म में 'गुरु' केवल शिक्षक नहीं, बल्कि वह चैतन्य शक्ति है जो जीव को 'अंधकार' (गु) से 'प्रकाश' (रु) की ओर ले जाती है। श्री बजरंग बाला जी दरबार, झज्जर (बरानी) का यह प्रयास आपको वहम-भरम से मुक्त कर विशुद्ध भक्ति से जोड़ेगा।
वेदों और उपनिषदों के अनुसार गुरु केवल व्यक्ति नहीं, एक "तत्व" है।
'गु' का अर्थ है अंधकार और 'रु' का अर्थ है प्रकाश। जो अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाए, वही गुरु है।
"अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥"
(गुरु वह है जो हमें यह बोध कराता है कि हम इस अखंड ब्रह्मांड से अलग नहीं हैं।)
शास्त्रों में गुरु भक्ति को ईश्वर भक्ति के समान अनिवार्य बताया गया है।
"यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ।
तस्यैते कथिता ह्यर्थाः प्रकाशन्ते महात्मनः॥"
(जिसकी ईश्वर में और गुरु में समान 'परा भक्ति' है, उसी के हृदय में वेदों के गूढ़ अर्थ प्रकाशित होते हैं। ज्ञान ठूंसा नहीं जाता, यह गुरु कृपा से प्रकट होता है।)
भगवान शिव स्कंद पुराण में कहते हैं: "गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः"।
वेद, उपनिषद, गुरु गीता और संत वाणी के आधार पर गुरु महिमा का प्रमाणिक संग्रह जो आपके विवेक को जाग्रत करेगा।
श्री बजरंग बालाजी दरबार केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक 'जाग्रत चेतना केंद्र' है। यहाँ का मुख्य उद्देश्य भक्तों को पाखंड से बचाकर हनुमान जी की सात्विक भक्ति से जोड़ना है।
"नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा"
दरबार का स्पष्ट मत है कि जो हनुमान जी (रुद्र अवतार) की शरण में है, उस पर किसी भूत-प्रेत या तंत्र-मंत्र का प्रभाव नहीं हो सकता। भय का एकमात्र इलाज ज्ञान और भक्ति है।
आज के इंटरनेट युग में, जहाँ सब कुछ गूगल पर उपलब्ध है, वहां देहधारी गुरु की आवश्यकता क्यों है? विज्ञान इसे मनोवैज्ञानिक दृष्टि से कैसे देखता है?
इंटरनेट आपको 'श्लोक' दे सकता है, लेकिन 'अनुभव' नहीं। गुरु चीनी की मिठास के बारे में बताता नहीं, बल्कि चीनी खिलाकर उसका स्वाद चखाता है। आध्यात्मिक ज्ञान 'डेटा' नहीं, 'अनुभूति' है।
शोध बताते हैं कि लयबद्ध मंत्रोच्चारण (Rhythmic Chanting) मस्तिष्क की Neuroplasticity को बढ़ाता है। सामूहिक कीर्तन से मस्तिष्क में सकारात्मक रसायन (Dopamine/Serotonin) स्रावित होते हैं जो तनाव (Anxiety) को कम करते हैं।
"गुरु जी, अब आप संभालो" - यह समर्पण भाव मस्तिष्क के Frontal Lobe को शांत करता है और भय केंद्र (Amygdala) की सक्रियता घटाता है। इससे मानसिक भार कम होता है और निर्णय क्षमता बढ़ती है।
"अज्ञान के अंधकार में भटकते हुए आधुनिक मनुष्य के लिए गुरु ही एकमात्र प्रकाश स्तंभ है।"