जय श्री राम | ॐ सिया रामाय नमः | जय हनुमान

सिद्ध सम्पूर्ण हनुमान भक्ति पूजा विधि

Shri Hanuman Bhakti

श्री हनुमान भक्ति

प्रेम और समर्पण का मार्ग

इस विधि का रहस्य

सृष्टि का नियम है कि हर वस्तु का अपना एक आधार और नियम होता है। उसी प्रकार हनुमान जी कहते हैं कि "मुझे प्राप्त करने का भी एक नियम है।" श्री बजरंग बाला जी दरबार में हर मंगलवार और शनिवार को इसी विधि से सामूहिक प्रार्थना की जाती है।

यह विधि कर्मकांड से मुक्त है और भाव पर आधारित है। इसमें भक्त को केवल क्रिया नहीं करनी, बल्कि हर शब्द को अपने जीवन और मन-मस्तिष्क में महसूस करना है।

"प्रभु कृपा करें कि हम श्री राम जी के चरणों से जुड़कर हनुमान जी की भक्ति का पूर्ण आनंद प्राप्त कर सकें।"

श्री बजरंग दास जी महाराज द्वारा प्रेरित

श्री हनुमान भक्ति विधि

यह मात्र एक पूजा नहीं, एक दिव्य संवाद है। श्री बजरंग बालाजी दरबार द्वारा हर मंगलवार और शनिवार को संचालित यह विधि एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसे स्वयं हनुमान जी ने साक्षात दर्शन देकर श्री बजरंग दास जी महाराज को प्रेरित किया था।

मंगलवार और शनिवार

भाव प्रधान

श्री बजरंग दास जी महाराज

श्री बजरंग दास जी महाराज

संस्थापक, श्री बजरंग बाला जी दरबार

पंच-चरण साधना

1

श्री राम आज्ञा (Permission)

हनुमान जी 'राम-दूत' हैं। वे स्वतंत्र नहीं, वे पूर्णतः श्री राम के अधीन हैं। जिस प्रकार किसी बड़े अधिकारी से मिलने के लिए पहले अनुमति लेनी पड़ती है, उसी प्रकार हनुमान जी की 'एक्टिव भक्ति' शुरू करने के लिए राम जी की आज्ञा अनिवार्य है।

2

ऊर्जा जागरण (श्री हनुमान चालीसा)

इस विधि का सबसे महत्वपूर्ण पाठ यह है कि हनुमान चालीसा को केवल पढ़ना नहीं है। हनुमान जी की हर चौपाई को अपने जीवन और उनके प्रताप का प्रतीक मानकर, अपने मन-मस्तिष्क में एहसास (Feel) करना है।

3

शक्ति स्मरण (संकट मोचन हनुमानाष्टक)

तीसरे चरण में हम 'हनुमानाष्टक' के जरिए प्रभु चरणों में समर्पित होकर, उनके द्वारा आज तक सृष्टि पर किए गए उपकारों को याद दिलाते हैं। यह 'याद' ही उनकी सुप्त शक्तियों को भक्त के लिए जागृत करती है।

4

कार्य सिद्धि (बजरंग बाण)

यह वह चरण है जहाँ हनुमान जी 'एक्टिव' होते हैं। लेकिन शर्त यह है कि भक्त के हृदय में दोहे की पहली पंक्ति—'निश्चय' (दृढ़ विश्वास) और 'प्रेम' का भाव पूरी तरह से स्थापित होना चाहिए।

पूर्णता (श्री आरती)

यह विधि तभी संपूर्ण (Complete) होती है, जब अंत में श्री हनुमान जी की आरती की जाती है। इस दरबार की सबसे सुंदर प्रेरणा यही है कि हम श्री राम जी के चरणों से जुड़कर, हनुमान जी की आरती के माध्यम से भक्ति का परमानंद प्राप्त करते हैं।